शनिवार, 7 जनवरी 2012

आज के मार्डन नारी मन !

आज के मार्डन नारी मन !
ये फैसन के पुजारी मन !
मार डारिन गा गमला संगी ,
ये बडभरी बीमारी मन !!


अपन मन करै, ठठ्ठा हंसी !
हमर घेच माँ लगथे फासी !
हमर हो जाते बदनामी , 
बांचा जाथे कुवारी मन !!

कपडा पहिरे आनी-बनी !
इसनो, प्उडर  के मनमानी !
देखत हमर जीवारा माँ उतरथे ,
ये मीठी कटारी मन !!


चटक मटक  दिखे सनान!
अऊ नैना के मारे  बान !
छीन भर मा ले लेते प्राण ;
ये चतुर  शिकारी मन !!

रूप के ये मन जाल  बिछा के !
कभू  हांस के कभू लजा के !
बेंदरा सरिक नांच नाचाथे;
हमला ये मदारी मन !! 


हम तो अड़हा  के अड़हा रही गेन !
कौनो ला कुच्छु नि कहेंन !
हमर समझ मा कभू नि आइस ;
ये दुनिया दरी मन  !!


घर के राज दुलारी मन ! 
ये कनिया कुवारी मन ! 
हमर जान  के दुश्मन आय ;
बाच  के रहू संगवारी मन !!



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