रविवार, 3 अप्रैल 2016

तै पढ़ा तै पढ़ा तै पढ़ा गुरूजी।

तै पढ़ा,तै पढ़ा , तै पढ़ा गुरूजी।



रहय कोनो झिन अड़हा गुरूजी।।
तै पढ़ा, तै पढ़ा ,तै पढ़ा गुरूजी।।



एक-एक कक्षा,सौ सौ लइका;
              हर लइका ल ज्ञान दे ।
का व्यवस्था,का बेवस्था ;
             एला तै  झिन धियान दे।

तोरे भरोसा हे कइसनो कर फेर;
तही ह जोखा ल मढ़ा गुरूजी।।


तै पढ़ा, तै पढ़ा ,तै पढ़ा गुरूजी।।


जेन लइका स्कूल नई आवय,
               ओला स्कूल म लाने ल परही।
निति हे शासन के चाहे बिन चाहे ;
                   तोला ,ओला माने ल परही ।

शिक्षा झिन मिलय फेर साक्षर बनाना हे।
नाव ल रजिस्टर म चढ़ा गुरूजी।।


तै पढ़ा तै पढ़ा तै पढ़ा गुरूजी ।



फोकट म सब ला ,सब कुछ चाही
                 नवा जमाना के इही लोकतन्त्र ये ।
चलनी म चाल फेर रजगा झन निकालबे
            सस्ता लोकप्रियता के इही मूलमन्त्र ये।

खिंच-तान अउ ढकेल-पेल फेर;
सबो ल आघू बढ़ा गुरूजी।


तै पढ़ा, तै पढ़ा, तै पढ़ा गुरूजी।



न बने बिजहा,न उपजाऊ भुइयां;
                 न बने खातू , न हवा पानी ।।
परही तुतारी , तुही ल रे  बइला;
                   तोरे भरोसा होही किसानी।।



न समय पे तोला मिलही रे चारा
फेर फसल रहय झन  कड़हा गुरूजी ।।


तै पढ़ा,तै पढ़ा, तै पढ़ा गुरूजी।



   मथुरा प्रसाद वर्मा "प्रसाद'
   ग्राम-कोलिहा ,लवन 
       बलौदाबाजार  छ ग 
           8889710210 ु

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