सोमवार, 23 मई 2016

शिक्षा कब मिलही

तरिया पार म बइठ बाबा ह करे मुखारी।
आती जाती लोगन मन पूछय हाल।
अब नई पूछय कोनो कोनो ले
कहाँ जात हस
कब लहुतबे।
अपन अपन म बूड़े रैथन
पढ़े लिखें के इही सुभीता
कोनो ल कोनो से कुछू मतलब नई हे।
गाँव गाव म स्कुल खुलगे।
बड़े बिहिनिया लोग लइका
स्कूल जाथे।
स्कूल म अब लइका मन ल सब मिल जाथे।
खाना पीना , कापी पुस्तख  ओनहा चेन्द्रा।
शौचालय भी अब स्कूल के चकाचक हे।

गुनत रइथे काका दाई हा
ओ स्कूल म लइका मन ला कब शिक्षा मिलही
जिहा हमर लइका
रोज धर के थारी जाथे।

जिहा हमर लइका
रोज धर के थारी जाथे।

मथुरा प्रसाद वर्मा" प्रसाद'

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