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यार गदहा रे।

झन सरमा तँय यार गदहा रे।
तोरे  सहीं   संसार गदहा रे ।
नारियाये बर सबे नारियाथे
तही ह  खाथस मार गदहा रे।

लड़ चुनाव मंत्री बन जाबे,
मिहनत हे बेकार गदहा रे।
पढहे लिखे मन करय मजूरी ,
सिस्टम हे बेकार गदहा रे।

का सासन अउ का परसासन ,
माते भ्रस्टाचार गदहा रे।
बड़े बड़े ल कोन सुधारय ,
संसद हे लाचार गदहा रे।

लगाये मुखउटा बाटय गियान,
तोरे रिस्तेदार गदहा रे ।
कतको चेला आघू पाछु,
रोज खड़े हे  दुवार गदहा रे।

नियत म तोर वफादारी हे,
तभे खड़े लाचार गदहा रे।
तहुँ हा ऊँचा पदबी पाबे,
बन थोड़ा मक्कार गदहा रे।

कहे प्रसाद पुकार गदहा रे,
झन करबे  कभू प्यार गदहा रे।

हो जाही कहूँ तोरो शादी

जिनगी तब बेकार गदहा रे।


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छत्तीसगढिया शायरी

नसा  नस-नस मा समागे , आज के समाज के ।।  नसा के गुलाम होगे , नवजवान आज के ।।  पीढी -दर -पीढी एखर  परचार चलत हे अरे एखरे कमाई मा  सरकार चलत हे ।।


मोर घर छितका कुरिया अऊ, तोर महल अटारी हे ।। तोर घर रोज महफिल अऊ, मोर सुन्ना दुवारी हे ।। तहु भरपेट नई खावस, महु भरपेट नई खावव  तोला  अब भूख नई लागय, अउ मोर  जुच्छा थारी हे ।।

अब फेर आहीं

अब फेर आहीं हमर दुवारी वो मन ।।
करही एक दूसर के चारी वो मन।।


काबर कि आवत हे अब फेर चुनाव।
बन जाहीं हमन के संगवारी वो मन।।


देखाहीं हमला फ़ेर सुराज के सपना
मारहीं आनीबानी के लबारी वो मन ।।


अभी तो माढ़ ही इखर गोड़ भुइयां मा
फेर आगास मा उड़ाही वो मन।।


हम मन ला भुला जाही पांच बछर फेर
कुर्सी के करही रखवारी वो मन ।।

शायरी मोर छत्तीसगढ़ के

ओकर हक म नई आवय फूल, जे पर बर कांटा बोही। के दिनभर  हांसही चाहे, कलेचुप साँझ के  रोही। पीरा ल देख के ककरो , कभू तंय झन हाँसे कर , आज मोर साथ होवत हे, काली तोर साथ म होही।


वो मोल देख भर लिही , गुलाबी गाल हो जाही। प्रेम फूल, फूलही अउ बगरके गुलाल हो जाही। भुलाये नई सकय  कभू, एसो के होरी ल; मया के रंग म रंग के , वो ह लाले लाल हो जाही।

तोर सुरता के गोटी ह गोड़ म गड़ जाथे। मया के पा के पंदोली  मुड़ म चढ़ जाथे। मैं सोज अपन रद्दा म आथव-जाथव फेर; जब तोला देख लेथव मोर मति बिगड़ जाथे।




मया म मुँह ओथराबे, त तै बीमार हो जाबे। वोकर बर जान दे देबे,तै अखबार हो जाबे। किनारे बैठ के रो-रो के कोंन ह पार उतरे हे; उदिम कर तै ह बुड़ जाबे या नदियाँ पार  हो जाबे।

मोर घर छितका कुरिया अऊ, तोर महल अटारी हे ।। तोर घर रोज महफिल अऊ, मोर सुन्ना दुवारी हे ।। तहु भरपेट नई खावस, महु भरपेट नई खावव  तोला  अब भूख नई लागय, अउ मोर  जुच्छा थारी हे ।।